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जजों के रिक्त पद 5 साल में दोगुना लंबित मामले 14.5 लाख के पार

हरियाणा में जजों के 308 तो पंजाब में 208 पद हैं रिक्त

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sarkari

Newz Fast, New Delhi पंजाब व हरियाणा की अदालतों में जजों की कमी के चलते लंबित मामलों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। पिछले पांच साल में हरियाणा में जहां लंबित मामलों की संख्या लगभग दोगुना हो गई है

तो वहीं पंजाब में यह करीब डेढ़ गुना बढ़ गई है। हैरत की बात यह है कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान जितने पद विज्ञापित किए जाते हैं उतने योग्य उम्मीदवार नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक बचते ही नहीं।

कानून मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से कुछ दिन पहले राज्यसभा में सौंपे गए आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में 2018 में जिला अदालतों में लंबित मामलों की संख्या 7 लाख 28 हजार थी जो 2022 में बढ़ कर 14 लाख 58 हजार हो गई।

लंबित मामलों की बढ़ती संख्या का कारण जजों के रिक्त पदों के रूप में समझा जा सकता है। जहां 2018 में जजों के रिक्त पदों की संख्या 162 थी वहीं 2022 में इनकी संख्या 308 हो गई।

इस बीच हरियाणा की अदालतों के लिए जजों की नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ की गई थी। 256 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती में केवल 114 आवेदकों को ही नियुक्ति मिल पाई और बाकी को अयोग्य करार दे दिया गया ।

पद मौजूद होते हुए भी योग्य आवेदकों के अभाव में जजों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है।

जिन 114 जजों को नियुक्ति दी गई है उन्हें अभी चंडीगढ़ ज्यूडिशियल अकेडमी में ट्रेनिंग से गुजरना होगा और ऐसे में अभी हरियाणा की अदालतों को इनके लिए एक साल इंतजार करना होगा।

पंजाब की अदालतों में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं।

जहां 2018 में पंजाब की अदालतों में 6 लाख 2 हजार केस लंबित थे वहीं 2022 में लंबित मामलों का आंकड़ा 9 लाख 23 हजार  पहुंच गया। पंजाब में. लंबित मामलों की संख्या बढ़ने की गति का एक बड़ा कारण जजों की कमी रहा है। 2018 में पंजाब की जिला अदालतों में 144 न्यायाधीशों के पद रिक्त थे जो 2022 में बढ़ कर 208 हो गए।